रंग
April 24, 2018 · Poemsरंग देता हूँ कागज़ को,
कभी रंगों से,
कभी ख़यालों से,
कभी सवालों से
बह रही हाथों से रोशनाई,
कई दिनों से,
महीनों से,
कई सालों से
रुकते नहीं,
ये ख़्वाब,
ये ख़याल,
ये सवाल
ना सुझावों से,
ना जवाबों से,
ना अज़ाबों से
रंग देता हूँ कागज़ को,
कभी रंगों से,
कभी ख़यालों से,
कभी सवालों से
बह रही हाथों से रोशनाई,
कई दिनों से,
महीनों से,
कई सालों से
रुकते नहीं,
ये ख़्वाब,
ये ख़याल,
ये सवाल
ना सुझावों से,
ना जवाबों से,
ना अज़ाबों से