है बात कुछ और
April 29, 2018 · Poemsयहाँ बारिश नहीं होती,
है ये बंजर ज़मीन,
यहाँ बारिश नहीं होती
है ये नफ़रतों में लीन,
हमदर्दी की नुमाइश नहीं होती
रहते हैं बस हिंदू-मुस्लिम, दलित-पंडित, काले-गोरे, मर्द-औरत
यहाँ, अब इंसानों की रिहाइश नहीं होती
यहाँ बारिश नहीं होती
अब माँगें तो क्या-क्या माँगें,
ख़ुदा से करने को अब,
कुछ ख़्वाहिश भी नहीं होती
है बात और कुछ
(कोई समझता नहीं,
और समझने की गुंजाइश भी नहीं होती)